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सरस्वती- वंदना

हर लो मेरी सारी कुमती - माँ सरस्वती।
मति मेरी मैया कमती - माँ सरस्वती।
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शब्दों का संसार दे मुझे, भावों का भण्डार दे मुझे।
या मेरे मन में आय रमती - माँ सरस्वती।
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जब भी ज़रा भटक जाऊं तो, तेरी शरण में आ जाऊं तो।
तू दुर्बुद्धि दूर करती - माँ सरस्वती।
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बाल्मीकि इतिहास बन गए, काली कालिदास बन गए।
तू ही देती सबको सुमती - माँ सरस्वती।
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अपने वर से खिला दे 'कमल' को, पोखर के इस खारे जल को।
शारद कर दे सरस सरबती - माँ सरस्वती।